Thursday, 24 November 2016

वो कहता है तो कांग्रेस मुक्त भारत कर के रहेगा ?

कड़वा सच ?                                                                                                                                          अपने  विवेक हिन्  नेताओ की वजह से  काग्रेस   बदनाम  हो गयी। पहले दिग्विजयसिह ने खूब उलूल जुलूल  बयानबाजी कर  के अपनी छवि हिन्दू विरोधी बनाई ? फिर आतंकियों को सम्मान दे कांग्रेस की छवि  राष्ट्र विरोधी बनाई ? और अब राज्यसभा में  गुलाम नबी  आजाद ने  रही सही कसर  पूरी कर डाली पक्की मोहर लगा ली ? और  अब बिना समय गवाए demonetization का विरोध कर के कांग्रेस  भष्टाचारियो और काले धन वालों के साथ नज़र आ रही हैं। अब थोड़ा संभलने की कोशिश करें  लोग  भूल जाये  तो मोदी जनता को भूलने नहीं  देगा ? वो  कहता है तो  कांग्रेस मुक्त भारत कर के रहेगा ?  जिसमे  कांग्रेस  के  नेता  दिग्गी  गुलामनबी  आजाद  और  आनंद  शर्मा  का  महत्वपूर्ण  योगदान  रहेगा  ?

Friday, 18 November 2016

// राहुल की दिशा हिन् राजनीती फीकी है सरस नही //

// राहुल की  दिशा  हिन्  राजनीती फीकी है सरस नही //
राहुल की राजनीती फीकी है सरस नही ! क्योकि ये भावना प्रधान देश है और सोनिया राहुल को लोगो की भावनाओ को भड़काना नही आता वे दोनों इसीलिए असफल है ! जबकि इसी हथियार से प्रियंकाजी ने माँ बेटे को जीत दिलवाई ! राहुल के लिए बेहतर है लोगो से भावनात्मक रूप से जुड़े बाप और दादी की शहादत को नजर अंदाज न करे और मोदी का नाम लेना बंद करे ? जनता खुद बखुद शौर मचाएगी लेकिन आप आलोचना करोगे तो सिम्पेथी मोदीजी के साथ जाएगी और बीजेपी आप को अपने कायर्काल का आईना दिखाएगी और कांग्रेस मुक्त भारत की भविष्यवाणी चरितार्थ हो जायगी ? इसलिये बेहतर है इन सब बातो को ठंडी होने तक अपने संगठन को ग्रास रूट तक मजबूत करो ! देशहित में अच्छे कार्यो की प्रशंसा करने की आदत डालो जनता की सहानुभूति मिलेगी क्योकि भारत का लोकतंत्र नीतियों से नही दिल से चलता है ? दिल जितने की कला आना चाहिए ! केजरीवाल की तरह मीडिया में बने रहने के लिये मोदी से कंपीटिशन कर राष्ट्र हित के खिलाफ उलुल जुलूल बयान बाजी कर अपने प्रति लोगो में नफरत पैदा न करे ? क्योकि ये आपा धापी चार दिन की है अभी जनता को जो बेहतर लगा रहा है उसके नतीजे भी बेहतर आने लगे तो ? मुँह छुपाना मुश्किल होगा अत: बेहतर है चुप रहे समय का इंतजार करे ? समय बड़ा बलवान होता है ?

Wednesday, 16 November 2016

जनता सब देख समझ रही है उन्हें मजा जरूर चखाएगी ?

  कड़वा सच ? भीड़ लाइन और भगदड़ से हमारा पुराना रोज मरे का नाता है तीज त्यौहार पर मन्दिर मेले नदी घाट पर मात्र अफवाह फैलने से वीभत्स घटनाओ में जन धन की हानि आम बात है / तो देश के लिए लाइन लगाने में और कोइ अनहोनी हो जाने में हायतोबा क्यों ? आज जो थोड़े दिनों की तकलीफ है सब कुछ सामान्य होने के बाद देश की जनता सब भूल जायेगी ? लेकिन जो राजनेता कालेधन और भ्र्ष्टाचार का समर्थन कर है और इस कदम का विरोध कर देशवासियो को उकसाकर देश में आशांति और हिंसा भड़काने की भरसक कोशिश कर रहे जनता उन्हें मजा जरूर चखाएगी //

Monday, 14 November 2016

// खोटा नारियल होली में // ?

  कड़वा सच ? //  खोटा  नारियल  होली में  // ?
उतर प्रदेश के  यादवी  संधर्ष में  चाचा भतीजे सब एक  हो गये  और इस संधर्ष  की   जिम्मेदारी  रामगोपाल यादव के माथे  ठोंक   शिवपाल ने  रामपाल को  पार्टी से निकाला ? अपना सिक्का जमाया और  अखिलेश पर जो गुस्सा था  रामगोपाल पर उतारा ? अखिलेश तो अभी यादवी बारात का दूल्हा  है  उसने  भी  यह कह कर की  फैसला  नेताजी करेगे अपना पीछा छुड़ाया // खोटा  नारियल होली में  रामगोपाल  बेचारा ?

Wednesday, 9 November 2016

कड़वा सच ? / भारी करी रे नमोनाथ जानी करि सकियो कोई उंगली तूने घुसेड दियो पुरो हाथ ?

कड़वा सच ? // भारी करी रे नमोनाथ जान नी करि सकियो कोई उंगली तूने घुसेड दियो   पुरो हाथ ? स्वतन्त्र भारत के इतिहास में अच्छे दिन आ गए ? भ्र्ष्टाचार कालेधन और मंहगाई के खिलाफ ये साहसिक फैसला लेने का सामर्थ केवल मोदीजी जैसा लोह पुरुष ही ले सकता है / लोकहित के इस क्रन्तिकारी निर्णय के विरोध में जो उल्लूल जुलूल विधवा विलाप कर गन्दी राजनीती पिरोह रहे वे अपनी बच्ची कुच्ची राजनीतिक जमीन से भी हाथ दो रहे ? सही और अच्छी बात को स्वीकार करने के लिए नैतिक बल चाहिए जो विरोधी दलो में नही है ? जबकि राष्ट्रहित और जनहित के फैसले निहित राजनीतिक स्वार्थ से नही देखे जाते / लेकिन सीमा पर आतंकवाद के खिलाफ और देश में कालाधन और भ्र्ष्टाचार के विरुद्ध मोदीजी द्वारा की जा रही सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध राजनितिक सोच का दिवालियापन है ? 

Thursday, 27 October 2016

मुलायम राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं, तो अखिलेश मार्क्स लीडर है ?

मुलायम राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं, तो अखिलेश अभी उतर प्रदेश में मार्क्स लीडर की भूमिका में है ? मुलायम सिंह यादव पहलवान रहे हैं, वो धोबी पछाड़ के माहिर रहे हैं, ये बात राजनीति समझने वाला हर आदमी जानता है. 1979 में वो जब विधायक बने थे तब से लेकर 1992 तक कई बारीक़ियाँ सिखकर बेनीप्रसाद वर्मा के साथ पार्टी बनाई. फिर बसपा के साथ मिलकर मुख्यमंत्री बने, फिर वो चर्चित गेस्टहाउस कांड जिसके बाद वो एक गुंडा पार्टी के नेता के तौर पर जाने गए. . 2006-07 जब लेफ्ट से सरकार गिराने का वादा करके यूपीए सरकार के साथ खड़े दिखे नेता जी. फिर एक बार फिर से 2013 में राष्ट्रपति चुनावों में ममता बनर्जी को धोखा दिया, जब वादे के खिलाफ जाकर प्रणब दा को समर्थन किया. कहते हैं क़ि मुलायम सिंह यादव वो नेता हैं जो राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए कुछ भी कर जाते हैं, वो अपने उन दुश्मनों को फिर से पार्टी में ले लेते हैं जिन्होने उनपर कभी गोली चलवाई थी. राजा भैया, बेनी प्रसाद, आज़म ख़ान, अमर सिंह, अजीत सिंह, इमामबुखारी और धार्मिक नेताओं के साथ उनके रिश्ते बनते बिगड़ते रहे हैं.   तो अखिलेश युवा होने के कारण मोदी के  पसंदीदा  मुख्यमंत्री  है ? .   अखिलेश हर बात को दिल पर ले लेते हैं,? जबकि मुलायम राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं, तो अखिलेश भी कम नही  आवश्यकता  पड़ने पर  अपने राजनीतिक  अस्तित्व  के लिए  चुनाव के बाद बीजेपी की बेसाखी  थामने  में देर नही करेगे ?  

Wednesday, 19 October 2016

समय की पुकार है नई क्रान्ति का शंखनाद है ?

  // कड़वा सच // ? आज देश में हर सेक्टर में घटती नोकरियों की समस्या विकराल होती जा रही है ? कम्पनी में फ्यूचर की कोई उम्मीद नही है ? कोई इंक्रीमेंट नही कास्ट कटिंग और भारी कॉम्पटीशन के चलते घटते प्रॉफिट आफ मार्जिन के कारण सम्भव नही की कम्पनियां बेहतर सैलेरी दे पाए। और अगर अनियोजित क्षेत्र को लो तो बहुत हालात खराब है। छोटी छोटी कम्पनियों में, दुकानों, पर काम करने वाले माल के कर्मचारियों ,निजी स्कूलों के टीचर,,कमर्सियल सेक्टर में ,हालात बहुत खराब 5 हजार से 10 हजार तक मिलते हैं।आखिर कैसे जिए इंसान कैसे परिवार चालाए फ्यूचर प्लानिग क्या ख़ाक किया जाया ? रेहड़ी वाले,खोमचे ठेले वाले,सब्जी वाले,रिक्सा पुलर,ड्रायवर मिस्त्री कारीगर मजदुर तो बढ़ती मंहगाई से खुद भी मंहगे हो जाते  और  सरकारी खेरात  के इनके लिए  द्वार खुल जाते ? लेकिन अनियोजित क्षेत्र // प्रायवेट नोकरी// वाले कितनी जद्दो जहद कर रहे जीने के लिए ? जब हम देखते हैं सरकारी कर्मचारियों  लगातार  उत्तरोत्तर बढ़ोतरी  के साथ पेंशन का लाभ मिल रहा है आखिर ये  विसंगति क्यों ?  सरकार को चाहिए की देश के प्रत्येक नागरिक को ६० साल की उम्र के बाद उसे सरकार पर आश्रित मान जैसे साशकीय कर्मचारियो अफसर,पुलिस कलेक्टर से लेकर चपरासी,नेता,मंत्री हर आश्रित व्यक्ति को जितना व्यक्ति को जीवन यापन हेतु लगता है उतनी एक सामान सब को पेंशन दे ? क्योकि जब व्यक्ति सेवा में था उसकी जितनी योग्यता का दोहन सरकार ने किया उतना भुगतान सेवाकाल में उसने प्राप्त कर लिया? अब आश्रय निधि तो हर आश्रित को सामान मिलना चाहिए यही सामाजिक न्याय है ? समय की पुकार है  नई  क्रान्ति  का शंखनाद है ?जिसमे दलित मुस्लिम सवर्ण हिन्दू सब साथ है ? बहुत सह लिया अब नही होने देगे आने वाली पीढ़ी के साथ ये अत्याचार है ? ?