Saturday, 10 June 2017

मोदी फेस्ट के नाम से दलित राजनीती ?



Saturday, 10 June 2017
मोदी फेस्ट के नाम से दलित राजनीती ?
 मोदी  फेस्ट के नाम से  दलित राजनीती  का प्रपोगंडा  खड़ा कर  दलित को  राष्ट्रपति  बनाना  मोदी और शाह की राजनीती का  हिस्सा  रहेगा ,   लेकिन  आर ,एस, एस  अपना  गुप्त  अर्जेंटा लागू जरूर  करेगा   ? इसे  कहते  है , मारेंगे और रोने भी  नहीं   देंगे ?
Posted by Dhiraj Dubey at 10:03 Email ThisBlogThis!Share to TwitterShare to FacebookShare to Pinterest

Friday, 9 June 2017

// श्रदेय नारायण प्रसाद शुक्ला /भैय्या / की पुण्यतिथि पर सादर स्मरण //
जूनि इंदौर के विद्वान कर्मकांडी प्रतिष्ठित ब्राह्मण परिवार में कांतिलालजी शुक्ल के यहां सन -------में आपका जन्म हुआ था / सात भाई बहनो में आप दूसरे नंबर पर सबसे बड़े थे और अपने बड़े होने की जवाबदारी को परिवार के प्रति आपने बखूबी निभाया / शैशव से यौवन तक आप अपनी अद्वितीय प्रतिभा से समय समय पर परिवार और समाज को प्रभावित करते रहे आप एक चिंतक विचारक और लेखक के साथ ही श्रेष्ठ ओजस्वी वक्ता थे / अपने विधार्थी जीवन में आप तात्कालीन समय में प्रदेश के सबसे विशाल होल्कर महाविधालय में सेलिब्रेशन सेक्रेटरी चुने गये तथा सन १९५२ में आपने छात्रों के विशाल आंदोलन जिसमे आजाद भारत के इतिहास में पहलीबार इंदौर में पुलिस द्वारा गोली चलाई गयी थी का नेतृत्व किया जिसकी वजह से आपको काफी समय पुलिस से बचने हेतु भूमिगत होना पड़ा था / यही से आपका सक्रीय राजनीती में प्रवेश हुआ पार्षद फिर इंदौर के महापौर चुने गये / आपकी अद्वितीय प्रतिभा ने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व पंडित द्वारकाप्रसाद मिश्रा को काफी प्रभावित किया जो कालांतर में आपके राजनैतिक गुरु रहे जिनका मरते दम तक आप को पुत्रवत स्नेह प्राप्त हुआ /मालवा के ब्राह्मणो के आदर्श चरित्र परम भगवती उपासक भैय्या की राजनीतिक सूझ बुझ का लोहा तत्कालीन राजनीती के बड़े बड़े दिग्गज भी मानते थे ! आपको राजनीती में ब्राह्मणवाद के प्रणेता के रूप में देखा जाता है ! गृहस्थ संत राजनीतिक सूझबूझ और संभावनाओं के भविष्य द्रष्टा भैय्या राजनैतिक चरित्र की आदर्श मिसाल थे उनकी राजनैतिक सूझबूझ उनके अनुयायियो के लिए सीढ़ी की तरह थी जिस की बदौलत कइयों ने राजनैतिक उपलब्धियां हांसिल की ।
श्रदेय भैय्या अपने राजनैतिक सफर में इंदौर के मेयर फिर मध्य्प्रदेश कांग्रेस के महासचिव एवं विधानसभा में उपाध्यक्ष तथा प्रदेश के सूचनाप्रसारण तथा गृह राजयमंत्री पद पर सुशोभित रहे / सराहनीय राजनैतिक उपलब्धियां प्राप्त करने वाले भैय्या काजल की कोठरी में भी बेदाग़ रहे और उनका स्वभाव व् आत्मीय व्यवहार कभी नहीं बदला अहंकार रहित अति संतोषी भैय्या को जीवन में कभी भी पद प्रतिष्ठा मान सम्मान किसी व्यक्ति या वस्तु के लिये आतुर होते नहीं देखा माँ भगवती के प्रति आपकी असीम आस्था थी / भैय्या का जीवन एक खुली किताब की तरह है जिससे हमे ईमानदारी धैर्य संयम सब्र और आपार संतोष से सुखी और आदर्श जीवन जीने की सिख मिलती है /

आसमान की तरह निश्छल समुद्र के समान विशाल ह्रदय वाले तथा पृथ्वी के सामान धैर्यवान भैय्या के जीवन चरित्र को रेखांकित कर सकूँ इतना सामर्थ मुझ में और मेरी कलम में नहीं है ?
संत ह्रदय भैय्या को शत शत नमन //
/ आपसे पुत्रवत स्नेह प्राप्त कर कृतार्थ /
// धीरज- दुबे एड. //

Thursday, 8 June 2017

स्वर्गीय नारायण प्रसाद शुक्ला // भैय्या // मेरी नजर से ?

 स्वर्गीय  नारायण प्रसाद  शुक्ला  मेरी नजर से ?
श्रदेय नारायण प्रसाद  शुक्ला का जन्म  जूनि इंदौर के   विद्वान कर्मकांडी प्रतिष्ठित  ब्राह्मण  परिवार में   कांतिलालजी  शुक्ल  के यहां   सन  -------में हुआ था / सात भाई  बहनो में आप दूसरे  नंबर पर सबसे बड़े थे और अपने  बड़े होने की जवाबदारी को परिवार के प्रति आपने बखूबी निभाया / शैशव से यौवन तक  आप अपनी अद्वितीय प्रतिभा से  समय समय पर   परिवार और समाज को प्रभावित  करते रहे  आप एक चिंतक विचारक और लेखक के साथ ही  श्रेष्ठ ओजस्वी वक्ता थे / अपने विधार्थी  जीवन में आप  तात्कालीन समय में प्रदेश के सबसे विशाल   होल्कर  महाविधालय में  सेलिब्रेशन  सेक्रेटरी  चुने गये तथा सन १९५२ में आपने  छात्रों  के विशाल आंदोलन  जिसमे आजाद भारत के इतिहास में पहलीबार  इंदौर में पुलिस द्वारा गोली  चलाई गयी थी  का   नेतृत्व किया जिसकी  वजह से आपको काफी समय पुलिस से बचने हेतु भूमिगत होना पड़ा था / यही से आपका सक्रीय  राजनीती में प्रवेश हुआ  पार्षद फिर  इंदौर के महापौर  चुने  गये / आपकी अद्वितीय प्रतिभा ने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व  पंडित  द्वारकाप्रसाद मिश्रा को काफी प्रभावित किया  जो कालांतर में आपके राजनैतिक गुरु रहे  जिनका  मरते  दम तक आप  को  पुत्रवत  स्नेह  प्राप्त हुआ /मालवा के ब्राह्मणो के आदर्श चरित्र  परम भगवती उपासक भैय्या की राजनीतिक सूझ बुझ का लोहा तत्कालीन राजनीती के बड़े बड़े दिग्गज भी मानते थे ! आपको राजनीती में ब्राह्मणवाद के प्रणेता के रूप में देखा जाता है ! गृहस्थ संत राजनीतिक सूझबूझ और संभावनाओं के भविष्य द्रष्टा भैय्या राजनैतिक चरित्र की आदर्श मिसाल थे उनकी  राजनैतिक  सूझबूझ उनके अनुयायियो के लिए सीढ़ी की तरह थी जिस की बदौलत कइयों ने राजनैतिक उपलब्धियां हांसिल की । 
श्रदेय  भैय्या अपने  राजनैतिक  सफर में इंदौर के मेयर फिर मध्य्प्रदेश  कांग्रेस के  महासचिव एवं      विधानसभा में  उपाध्यक्ष तथा  प्रदेश के  सूचनाप्रसारण  तथा  गृह  राजयमंत्री पद पर सुशोभित रहे / सराहनीय राजनैतिक उपलब्धियां प्राप्त करने वाले भैय्या काजल की कोठरी में  भी  बेदाग़  रहे और  उनका स्वभाव व् आत्मीय व्यवहार कभी  नहीं बदला अहंकार रहित  अति  संतोषी भैय्या को जीवन में कभी भी पद प्रतिष्ठा मान सम्मान किसी व्यक्ति या वस्तु के लिये आतुर  होते नहीं देखा / भैय्या  का जीवन  एक खुली  किताब की तरह है  जिससे  हमे  ईमानदारी  धैर्य  संयम सब्र और आपार संतोष  से सुखी और आदर्श जीवन जीने  की प्रेरणा  मिलती है /

        आसमान की तरह  निश्छल  समुद्र  के  समान  विशाल ह्रदय वाले  तथा  पृथ्वी  के सामान  धैर्यवान  भैय्या  के  जीवन चरित्र को रेखांकित  कर  सकूँ  इतना सामर्थ  मुझ  में और मेरी  कलम में नहीं  है ?
संत  ह्रदय  भैय्या को शत शत  नमन //
 / आपसे  पुत्रवत  स्नेह प्राप्त कर कृतार्थ /
// धीरज- दुबे  एड. //

Wednesday, 7 June 2017

शिवराज सरकार ने उपद्रवियों को प्रोत्साहित करने हेतु ?

शिवराज सरकार ने उपद्रवियों को प्रोत्साहित करने हेतु उपद्रव में मरने वालों को एक करोड़ घायलो को पांच लाख रुपये देकर आदमी की जान का सरकारी समर्थन मूल्य तय किया। हिंदी फिल्म पिपली लाईव की तरह प्रदेश के किसानों को अपने परिवार की आर्थिक दशा सुधारने का सुनहरा अवसर उपद्रव करो घायल हो तो 5 लाख औऱ मरो तो एक करोड़ रु ईनाम पाओ । जल्दी हाइवे जाओ हुड़दंग मचाओ शिव मामा के गुण गाओ ।

Saturday, 3 June 2017

चिड़िया चुग गयी खेत अब पछताए क्या हो ?

मध्य्प्रदेश का  किसान आंदोलन  असल में  ग्रामीणों के   आक्रोश का नतीजा  है  ? प्रदेश सरकार  ने  धोखेबाजी  कर  केंद्र सरकार द्वारा  पारित भूमि अधिग्रहण बिल  में  किया गया संशोधन  है  जिसमे केंद्र  सरकार  ने  ग्रामीण क्षेत्रों में  गाइड लाइन से  चार गुना और शहरी  क्षेत्रों  में  दुगना  मुआवजा  देने का प्रावधान किया था / लेकिन  शिवराज सरकार ने   इसे  स्वीकार न करते  हुये  इसमें  संशोधन  कर   मनमाने  अधिग्रहण  के खिलाफ   किसानो से न्याय  हेतु कोर्ट   जाने का अधिकार भी  छीन लिया  है  /  लेकिन     समय रहते न किसान चेते    और न मृत  प्राय  विपक्ष  को  समझ आया की  बिल  सरकार ने कब पास कराया ?
चिड़िया चुग गयी खेत अब  पछताए क्या हो ? इसके दूरगामी परिणाम  आगामी विधानसभा चुनाव के बाद   भाजपा की  सरकार दिखाएगी ?

Monday, 29 May 2017

सिर्फ भाषण और प्रचार  तेरह   साल से लीपा -- पोती करते  शिवराज /  मामा को लोकप्रियता  की ज्यादा है खुजाल  जिसे पसंद नहीं करती दिल्ली  की सरकार  भगवान तेरी  भली  करे  शिवराज ?

Tuesday, 2 May 2017

ब्राहम्णो में जागृति आयी है ?

कड़वा सच ? भले आपसी खींचतान हो नकिलयो की भरमार हो लेकिन यह बात तो संतोषजनक है की  ब्राहम्णो   में चेतना  और जागृति आयी है / लेकिन ब्राह्मण संगठनो की भूमिका को राजनीतिज्ञो ने राजनैतिक स्वार्थ तक सिमित कर दिया है / जब की आज संधर्ष की भूमिका की आवश्यकता है ? मध्य्प्रदेश में गैर ब्राह्मण पुजारीयो की नियुक्ति ब्राह्मणो के खिलाफ षड्यंत्र है ? ये विषय जीविकापार्जन का नहीं २ परसेंट ब्राह्मण परिवार भी आश्रित नहीं होंगे कर्मकांड से लेकिन ? ये ब्राहम्णो के सामान का प्रश्न है ?  समाज में  ब्राह्मण  के स्थान का प्र्शन  है ?  दबी जबान से ही सही ब्राह्मण विधायकों सांसदों को अपनी बात यथोचित उठाना चाहिये और प्रदेश भर के ब्राह्मण संगठनों को इस सम्बन्ध में ज्ञापन भेजना चाहिए ?