Monday, 11 June 2018

7 - महिलाओ हेतु 33 प्रतिशत आरक्षण शीघ्र लागू करने की माँग ?

महिलाओ हेतु 33 प्रतिशत आरक्षण  का मामला पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद भी  धरातल पर नहीं उतरा  अपने मतलब के बिल  तो सरकार  धड़ाधड़  पास करवा रही ,और महिला आरक्षण मामले में  विपक्ष को दोषी ठहरने में लगी , ें दो मुंही  बातो कोहम समझते  है ,  इस हेतु प्रस्ताव पास कर सरकार को  इस संसद की भावना से अवगत कराया जाए ?

6 - स्वर्ण नौकरी पेशा बच्चो का आश्रितों के आधार पर हो , इन्कमटेक्स निर्धारण ?

  - स्वर्ण नौकरी पेशा बच्चो का आश्रितों के आधार पर हो , इन्कमटेक्स निर्धारण ?
अध्यक्षजी  में  पूछना  चाहती हूँ इस सदन से -----
 सरकार  बीमा   फंड  बांड खरीदने  मकान  जायदाद बनाने  मोटर गाडी खरीदने  यहां तक की सेर सपाटा  करने पर भी  इनकम टेक्स में छूट देती  है , लेकिन  एक मध्यमवर्गीय   परिवार  के जवाबदार बेटे को   बूढ़े  माँ -बाप  को सम्हालने  जवान बहन की शादी करने  छोटे भाई को पढ़ाने लिखाने  पर सरकार इनकम टेक्स में छूट प्रदान क्यों नहीं करती ,. .? हमरा प्रस्ताव  है  स्वर्ण  ब्राह्मण  बच्चो  आय के साथ  आश्रितों के आधार पर हो , इन्कमटेक्स निर्धारण ?

5 - परित्यगता ,विधवा विवाह को प्रोत्साहन , पुनर्वास ?

  - परित्यगता ,विधवा विवाह को प्रोत्साहन , पुनर्वास   हेतु सामाजिक सोच में बदलाव  आवश्यक है ,विधवा विधुर  विवाह की बात आती तो क्यों इनमे आपस में तालमेल भिड़ाने की  कोशिश  की जाती , कुंवारो  से इनकी शादी दोबारा  क्यों नहीं  करने की पहल की जाती                    
,  समाज को स्वीकार्य  क्यों नहीं ? विधवा परित्यगताओ  के प्रति समाज की सोच में बदलाव की  आवश्यकता  है। 

4 --- -उच्च शिक्षित गैर पेंशनधारी विधवा को साशन सम्मान निधि हर माह पेंशन स्वरूप में दे

  -उच्च शिक्षित गैर कामकाजी  बिना पेंशनधारी आर्थिक रूप से कमजोर  निराश्रित  महिलाओ तथा विधवा परित्यक्ताओ को साशन सम्मान निधि हर माह पेंशन स्वरूप में दे ? पेंशनधारीयो   की तो  आव भगत  मान सम्मान घर परिवार में  बरकरार  रहता और मरणोपरांत  पत्नी को आधी पेंशन की पात्रता है , लेकिन अन्य महिलाओ की   बड़ी दुर्दशा  है ,  मेरा सदन से  निवेदन हे की   इस  और  ध्यान देने की  विशेष  आवश्यकता है ?

3 --- बच्चो को शिक्षा के साथ रोजगार ग्यारंटी ?

  
मेरा इस सदन से अनुरोध  है ,हमारे  पूर्वज  कहते थे ये बच्चे हमारी फसल  है , किसान भी अपनी फसल को इस तरह छाती से लगाकर  बड़ी नहीं करता जैसे हम बच्चो को पालते  है  अपना सब कुछ  न्योछावर कर   अपनी सामर्थ्य  से ज्यादा   पढ़ाते   काबिल बनाते  , और रोजगार की मंडी में   कोइ  इन्हे धर्म साटे   नहीं पूछ रहा  तो  माँ बाप पर क्या गुजरती है ,एक बच्चे को सामान्य शिक्षा पर  15 से 20 लाख रु लगते है ,  और ईस कारण अध्यक्षजी   मध्यमवर्गियो ने तो  एक से ज्यादा   बच्चे   पैदा  करना ही बंद कर दिया , और इस तरह तो आने वाले समय में हम ब्राह्मणो का अस्तित्व  संकट में  है , 
इसलिये   अध्यक्षजी ,  जिस तरह  सरकार फसल ग्यारंटी  देती हे उसी तरह , हमारे बच्चो को रोजगार ग्यारंटी दे , जब तक रोजगार उपलब्ध  नहीं  होता  योग्यता के   आधार पर  सरकार मानदेय राशि दे , और उसमे  समय समय पर शाश्कीय नियमो अनुसार  बड़ोतरी करती रहे ?

2 -अप्रासंगिक हो चुकी रूढ़ियों और परम्पराओ में बदलाव , मृत्यु भोज ,मामेरा , विवाहिक फिजूल खर्ची ?

2 -अप्रासंगिक हो चुकी रूढ़ियों और परम्पराओ में बदलाव ,
देश काल और परिस्तिथियों अनुसार  हमारी रूढ़ियों  और परम्परा में आमूलचूल  बदलाव आवश्यक  है ,वैसे बच्चियों की पढ़ाई  और आत्मनिर्भरता ने दहेज प्रथा पर काफी कुछ अंकुश लगाया हे लेकिन इसका  स्थान अहंकारजनित   आडंबर  ने ले लिया  विवाह एक संस्कार   के बजाय आडंबर होता जा रहा अपना वैभव  और संम्पन्नता  दिखाने का  साधन बनता जा रहा , कर्ज  लेकर   महंगा डैकोरेशन गार्डन  अनेक स्टाल व्यंजन  ये फिजूल खर्ची अपने बच्चो के लिए नहीं  बल्कि हम  अपने वैभव प्रदर्शन हेतु  कर रहे है , में कहना चाहती हूँ  अध्यक्षजी यही  रकम नव वरवधू   को  आत्मनिर्भर और सुखी जीवन यापन करने हेतु प्रदान करना आज ज्यादा प्रासंगिक है , सच पूछा जाए  तो विवाह  सोलह संस्कारो में से एक अति महत्वपूर्ण संस्कार  है  जो केवल  कुटुम्बी  परिजन की सहभागिता  में  संम्पन्न  होना चाहिए , लेकिन  हमने इसे   समाज में स्टेटस और  व्यवहार  का जरिया बना लिया /  इसमें  मध्यम वर्गीय  बुरी तरह पीस रहा उसका कर्जा  और ब्याज कुछ माफ़ नहीं हो रहा ।  टेक्स  और मंहगाई  को रो रहा:/
अध्यक्षजी  वैसे तो  शने : शने :  अंतर्जातीय  तथा प्रेमविवाह   ने पत्रिका मिलान का चलन कम  कर दिया है , लेकिन फिर भी आज  देखने में आता है  की बार   पत्रिका  में  दोष के कारण  रिश्ता करने में बड़ी कठिनाई आती है , इस वहम को अभियान चालाकर हमे मिटाना होगा , पत्रिका मिलान का महत्व  और आवश्यकता  तब प्रासंगिक थी जब बच्चो के बाल विवाह कर दिए जाते  थे  , वर वधु  फिजिकल ही डेवलप नहीं होते तो  फ्यूचर की क्या बात  तो ? पत्रिका ही   आधार होता था  ,   दोनों के ग्रह  योग  से एक दूसरे का  निभाव  देखा जाता था ,  लेकिन अध्यक्षजी ,    आज  हम 26 , 28  साल के बच्चो का विवाह रचाते ताकि उनका  एजुकेशन  सेटल  जॉब घर बार परिवार की जिम्मेदारी  करीब करीब  जिंदगी की दिशा और दशा तय   हो चुकी होती  है ,आधी उम्र तो निकल चुकी होती  है ,ऐसे में  अब पत्रिका  जीवन में क्या   चमत्कारी परिवर्तन करेगा   कोनसी लाटरी खुलेगी या  गड़ा  मिलेगा ?, मृत्यु का दिन  किसी  पत्रिका में नहीं   लिखा होता ? हमे  ाआनेवाली पड़ी की ख़ुशी और समृध्दि  के लिए   अपनी सोच को बदलना होगा  ,घर  और परिवार में  क्रन्तिकारी परिवर्तन लाना होगा /
 अध्यक्षजी -------?
        मृत्यु  के बाद के  खटकर्म  मुखग्नि देने वाला   भाई बंधुओ  सहित  तेरह   दिन गंजा  हो सूतक की  कैद में  रहे , अब  संभव नहीं  आजकल का बच्चो का जीवन  मशीन  की तरह   हो गया  है , इसलिए तीन दिन में शोक  निवारण , सब अपने अपने   रास्ते ,  फिर जो   पैतृक  जहां  है  जैसा   उससे बने   वो करना चाहे करे  ,ये  जरुरी नहीं की मृत्यु के बाद लिटाकर  जहां तुमने पाटले बिछा दिए    वही  सारा उत्तर कार्य   हो , आत्मा तो परमात्मा में विलीन हो गई  , आत्मा सर्व व्यापी  है उसके निमित  कहि भी कुछ  करोगे  तो उसको  मिलेगा ,?
अध्यक्षजी  --- अपने बच्चो के खिरते  बालो को लेकर  रात दिन  चिंतित   रहने वाली माताए  अपने मरने  के बाद भी  अपने बच्चो को   गँजा   नहीं देखना चाहेगी , लेकिन लोक लाज रूडी परम्परा  आड़े आएगी , इसलिए  हम माता - बहनो  को  अपनी वसीयत बनानी  है  उसमे यही बात दोहरानी  हे की हमारे मरने के बाद कितनी और   कैसी रस्म तुम्हे निभानी ,  परिवार  में गंजी   किसी को नहीं करानी ?
 अगर मेरी बात  से सहमत   है  तो सदन  करतल ध्वनि  से   स्वीकार करे ?

Sunday, 10 June 2018

'' ब्राह्मण महिला संसद '' में प्रस्ताव --; 1- स्वर्ण आयोग का गठन -


1- स्वर्ण महिला आयोग का गठन -
विभिन  जातिगत  समीकरणो के मद्दे नजर सरकार ने  उनकी  सुरक्षा  तरक्की और विकास के लिए पर्याप्त  सुविधाए  यहां तक की  विशेष कानून  और  विशेष अदालत   तक प्रदान कि है , लेकिन समाज की दिशा तय करने वाले ब्राह्मण समाज के साथ छेड़छाड़ होने  कोइ सहानुभूति नहीं जबकि  दलित ,आदिवासी महिला को छेड़छाड़   पर 50 हजार  तत्काल बालात्कार की रिपोर्ट  होने पर 1 लाख रु तत्काल सहायता , और सामान्य महिला स्वयं अपने साथ हुई  ज्यादतीय  के  सबूत   ढूंढती   रहे   ये  कहाँ  का न्याय  है ?  अध्यक्ष महोदय ,आज  बड़ी तादात  में   नौजवान  लड़किया  महिलाये प्रायवेट नौकरी रोजगार मे हे उन्हें अपने काम के दरम्यान  अपने सहकर्मी या अधिकारी  की  हरकतों या स्वभाव के कारण   अनेक प्रकार की मानसिक और  शारीरिक  त्रासदी  से गुजरना पड़ता , लेकिन अपनी बदनामी या जॉब छूट जाने का  भय   , या आगे फिर घर वाले जॉब नहीं करने देंगे , एक नियोक्ता से पंगालिया तो अन्य जॉब नहीं मिलेगा ,  ये सोच  चुप रह जाती लेकिन अब ऐसा  नहीं चलेगा ,  अध्यक्षजी  हमारा प्रस्ताव है , जिस तरह अल्पसंख्यक आयोग , आदिमजाति कल्याण  ,पिछड़ावर्ग आयोग  है ,  इसी   तरह स्वर्ण महिला आयोग का गठन किया जाए ,जिसमे महिलाओ की समस्या  हेतु   संबंधितो को  कॉन्सलिंग कर  हिदायत दे , तथा  यहां सहायता हेतु  शिकायत करने वाली महिलाओ  का जॉब प्रमोशन अन्य सुविधा   सुरक्षित रहे ?  अध्यक्षजी  हमारी मांग है  की  शाश्कीय सेवारत  महिलाओ की तरह प्रायवेट  कम्पनियो में जॉब  करने वाली महिलाकर्मियों  को 6 माह   मेटेनिटी  लीव ,मेडिकल सुविधा अन्य नियम  कायदे , श्रम कानून  की तरह लागू हो , जिसकी मानिटिरिंग  स्वर्ण महिला आयोग करे /
अध्यक्षजी  कुल मिलाकर  हमारे कहने का अभिप्राय  है , प्रायवेट कम्पनियो में काम करने वाली महिलाओ को होने वाली रोजमर्रे की मुसीबत कठिनाई शोषण ज्यादती के खिलाफ उन्हें पुलिस कोर्ट कचहरी के झमेले से   पहले ,  महिला स्वर्ण आयोग से सहायता और शाश्कीय महिलाकर्मियों की तरह सुविधा   मुहैया  करने में सक्षम स्वर्ण  महिला आयोग का तत्काल गठन हो //  जय  हिन्द जय भारत