Tuesday, 12 June 2018

10 महिलाओ को पैतृक सम्पति में अधिकार पाने हेतु विशेष न्यायालय गठन करने की मांग ?

 पैतृक सम्पति में अधिकार पाने हेतु विशेष न्यायालय गठन करने की मांग  और इस विषय में सामाजिक सोच में बदलाव ?
अध्यक्ष महोदय ,
महिलाओ के सम्मान और अधिकारों के लिये समय समय पर  विभिन्न नियम  कानून  बनाये गए लेकिन उनका सही क्रियान्वयन नहीं होने से  महिलाओ को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा , जैसे  महिलाओ को  पैतृक सम्पति में  पुरुष  वारिस  के सामान बराबरी का अधिकार तो  है ,  लेकिन  उसको पाने हेतु एक बहन अपने भाईयो के खिलाफ   न्यायालय का दरवाजा खटखटाये तो  सिविल कोर्ट , हाईकोर्ट , सुप्रीम कोर्ट  तक जाए तो सारी उम्र  बीत  जाये '' हाथ पल्ले कुछ नहीं आये  और  ईश्वर  प्रदत्त  रिश्ता भी  गँवाय। 
इसलिये  हमारी गुजारिश  है , पैतृक  सम्पति संबंधी  विवादों और बटवारे हेतु विशेष न्यायालय गठित किये जाये  फेमिकी कोर्ट की तरह पहले सम्बंधित  पक्षों की कॉन्सलिंग हो ,  और समझौता नहीं होने की स्तिथि में फास्ट्रैक कोर्ट में इनका तत्काल फैसला हो ,  साथ ही अपने  जन्मसिध्द  अधिकार हेतु संधर्ष करने वाली महिलाओ के प्रति अपनी सोच को बदलना होगा ,उनके क्रन्तिकारी कदम की सराहना करना होगी उन्हें प्रोत्साहित करना होगा ?
 

9 - महिलाओ को मुखाग्नि देने, सारे उत्तर कार्य , कर्मकांड तर्पण आदि करने का अधिकार

  - महिलाओ को   मुखाग्नि देने,  सारे उत्तर कार्य , कर्मकांड  तर्पण  आदि करने का अधिकार  समाज को स्वीकार्य  हो क्योकि ,  अध्यक्ष  महोदय  आजकल  चाहे लड़का हो या लड़की एक ही   बच्चा  पालने की क्षमता  नई पीढ़ी में शेष  है ,और जब लड़का लड़की सब बराबर  है, तो अभिभावकों का उत्तरकार्य करने का लड़कियों को ससम्मान अधिकार हो। 

ब्राह्मण महिला संसद में कई विशिष्ठ महिला नेत्रीयां भाग ?

    राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा की राष्ट्रीय संगठन महामंत्री अलका अग्निहोत्रीजी के अनुमोदन तथा राष्ट्रीय प्रवक्ता धीरज दुबे के निर्देशन पर इंदौर शहर अध्यक्ष -श्रीमती बबिता शर्मा तथा प्रदेश महामंत्री मंजू चतुर्वेदी  दवारा सरकार के स्वर्ण ब्राह्मण विरोधी रवइये,और लगातार स्वर्ण महिलाओ की उपेक्षा के कारण विवश हो , राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा ने ''' स्वर्ण ब्राह्मण महिला संसद '' इंदौर में आयोजित करने का निर्णय लिया है , इसके पीछे कोइ राजनीती स्वार्थ नहीं है , बल्कि ब्राह्मण महिलाओ में जागृति और चेतना जगाने हेतु यह समय की मांग है , हमारा आव्हान है की देश के जातिवादी राजनैतिक दलदल में स्वर्ण ब्राह्मण समाज अपनी भूमिका प्रदेश में सरकार बनाने और बिगाड़ने में दिखाये और इस हेतु महिलाये आगे आकर मोर्चा संभाले अन्यथा स्वर्ण , ब्राह्मण हर स्तर पर नजरंदाज किये जाने लगे है ? चाहे फिर कोई ब्राह्मण कहीं पर भी हो उसे एक बार अपनी संगठित शक्ति का अहसास करना पड़ेगा , वरना ब्राह्मण अपना सामान खो देंगे ! वंदन चंदन करके थोड़े दिन आगे पीछे दौड़ भी लिये तो ज्यादा देर टिक कहाँ पाओगे हमारी जनरेशन अगड़े ,पिछड़े दलित मुस्लिम के बिच पीस कर रह जायेगी / सरकार की  वोट कबाड़ने के लिये  की गयी हर घोषणा और   योजना का खामियाजा कब तक स्वर्ण , ब्राह्मण मध्यम वर्गीय भुगतेंगे ? और जिसके कारण सबसे ज्यादा कठिनाई और तनाव हम महिलाओ को सहन करना पड़ता , अमीर को फर्क नहीं पड़ता , गरीब योजना के लाभ से मस्त  1 रु किलो गेहूं 2 किलो चावल 35 लीटर घासलेट बेचकर दारु पि रहा ,अधिकारी योजनाओ के क्रियान्वयन में मदमस्त ,मध्यमवर्गीय   जबरन   भुगते सरकारी वसूली  18 प्रकार के टेक्स उसके बाद पेट्रोल ,डीजल, गैस , बिजली ,पानी , मंहगाई, सामर्थ्य से ज्यादा मंहगी बच्चो की पढ़ाई ,फिर भी बेरोजगारी , पकोड़े   तलने  की नौबत आ गयी / ?
इसलिये अलग अलग बिखर कर ख़त्म होने से एक बार संगठित हो संकल्प ले, की जो मध्यमवर्गीय की बात करेगा , '' सम्मान से स्वर्ण ब्राह्मण को साथ लेगा ब्राह्मण उसी के साथ चलेगा '' ! वरना हम ब्राह्मणो को धार्मिकता के कारण संदेह की द्द्ष्टि से भी देखा जाता है , इस बात का भी हमे प्रमाण देना होगा की हम किसी धार्मिक राजनैतिक पार्टी के पिच्छेलगु नही है हमारा भी वजूद है, इस हेतु प्रदेश के विभिन्न प्रांतो से वहां के स्थानीय उपवर्गीय जातिगत संगठनो से इन सब बातो पर एक मत हो आगे की रूपरेखा तय करने हेतु , स्वर्ण ब्राह्मण महिला संसद का आयोजन किया जा रहा है ,   जिसमे स्वर्ण समाज की कई ख्यातनाम राजनैतिक महिला शख्सियत भाग लेनी वाली है /
अन्य जो ब्राह्मण महिला अपने विचार , प्रस्ताव रखना या कार्यक्रम में सम्मिलित होना चाहे ,वे महिला संसद प्रभारी  बबिता शर्मा  से मो 9340772394 तथा धीरज दुबे एड से मो 9893628279 पर सम्पर्क करे /अन्य प्रांतो से पधारने वाले महिला पदाधिकारी , प्रतिनिधि के आतिथ्य का पूर्ण इंतजाम इंदौर इकाई द्वारा किया गया है /

Monday, 11 June 2018

8 - प्रायवेट सेक्टर में आरक्षण पदान करने का पूर्ण बहिष्कार ?

 प्रायवेट सेक्टर में   आरक्षण पदान करने का पूर्ण बहिष्कार   किया जाना चाहिये , क्योकि  सरकार  की तुष्टिकरण की नीतियों से  स्वर्ण बच्चो  ने  शाशकीय  नौकरी की उम्मीद छोड़ ही दी है , अध्यक्ष  महोदय , एक मध्य्यमवर्गीय  परिवार अपना पेट काटकाट कर बच्चो को    काबिल बनाता है  ताकी अपनी योग्यता के आधार पर वह कुछ कर सके , क्योकि  पड़ना और नौकरी करना स्वर्ण ब्राह्मण  परिवारों की युवा पीढ़ी का   मुख्य जीविकापार्जन का साधन है , यदि प्रायवेट सेक्टर में भी हमारी  युवा तरुणाई  को निराशा और हताशा  ही हाथ लगेगी तो   वे टूट जायेगे ,और यह हम अभिभावकों के लिए घोर चिंता का विषय है  जिस पर विचार करना आवश्यक है।

7 - महिलाओ हेतु 33 प्रतिशत आरक्षण शीघ्र लागू करने की माँग ?

महिलाओ हेतु 33 प्रतिशत आरक्षण  का मामला पूर्ण बहुमत की सरकार होने के बाद भी  धरातल पर नहीं उतरा  अपने मतलब के बिल  तो सरकार  धड़ाधड़  पास करवा रही ,और महिला आरक्षण मामले में  विपक्ष को दोषी ठहरने में लगी , ें दो मुंही  बातो कोहम समझते  है ,  इस हेतु प्रस्ताव पास कर सरकार को  इस संसद की भावना से अवगत कराया जाए ?

6 - स्वर्ण नौकरी पेशा बच्चो का आश्रितों के आधार पर हो , इन्कमटेक्स निर्धारण ?

  - स्वर्ण नौकरी पेशा बच्चो का आश्रितों के आधार पर हो , इन्कमटेक्स निर्धारण ?
अध्यक्षजी  में  पूछना  चाहती हूँ इस सदन से -----
 सरकार  बीमा   फंड  बांड खरीदने  मकान  जायदाद बनाने  मोटर गाडी खरीदने  यहां तक की सेर सपाटा  करने पर भी  इनकम टेक्स में छूट देती  है , लेकिन  एक मध्यमवर्गीय   परिवार  के जवाबदार बेटे को   बूढ़े  माँ -बाप  को सम्हालने  जवान बहन की शादी करने  छोटे भाई को पढ़ाने लिखाने  पर सरकार इनकम टेक्स में छूट प्रदान क्यों नहीं करती ,. .? हमरा प्रस्ताव  है  स्वर्ण  ब्राह्मण  बच्चो  आय के साथ  आश्रितों के आधार पर हो , इन्कमटेक्स निर्धारण ?

5 - परित्यगता ,विधवा विवाह को प्रोत्साहन , पुनर्वास ?

  - परित्यगता ,विधवा विवाह को प्रोत्साहन , पुनर्वास   हेतु सामाजिक सोच में बदलाव  आवश्यक है ,विधवा विधुर  विवाह की बात आती तो क्यों इनमे आपस में तालमेल भिड़ाने की  कोशिश  की जाती , कुंवारो  से इनकी शादी दोबारा  क्यों नहीं  करने की पहल की जाती                    
,  समाज को स्वीकार्य  क्यों नहीं ? विधवा परित्यगताओ  के प्रति समाज की सोच में बदलाव की  आवश्यकता  है।