Sunday, 13 March 2016

कड़वा सच्च !
भाजपा के अनुवांशिक संगठनो ने भारतीय लोकतंत्र और समाज को तार तार कर बिखेर दिया विधार्थी परिषद ने अपनी पराजय का बदला लेने के लिये षड्यंत्र कर ! जे एन यू ! को बर्बादी की कगार पर ला दिया ! अपनी अति महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिये समाज को विखंडित कर एक गिरोह को सक्रिय कर दिया जो सारी व्यवस्थाओ को अपने हाथ में लेना चाहता है ! गैर राजनैतिक संगठनो में भी दखलं दाजी कर उनकी निर्वाचन प्रक्रिया में मेंडेड जारी कर आर एस एस ने राजनीती का अखाड़ा बनाना अपना पेशा बना लिया ! भाजपा और हिंदुत्व आर एस एस की विचारधारा से सहमत समर्थको की इस देश में कमी नही उन्ही की बदौलत आज प्रचंड बहुमत पाया है ! लेकिन इस सफलता से उत्साहित हो भेदभाव कर आमजन में इनके सौतेले व्यवहार से असंतोष की स्तिथि निर्मित हो रही है ! जो राष्ट्रीयता के लिये घातक है क्योकि राष्ट्रवादी सिर्फ ये या इनसे प्राप्त प्रमाण पत्र वाले ही है ! बाकी देश की जनता जो इनकी शाखा में नही जाते गद्दार है ! और इस बात के लिये आवाज उठाने वाला हर नौजवान इनकी निगाह में कन्हैया है !

Friday, 4 March 2016

 केजरीवाल   के   बाद   कन्हैया   मीडिया   की   दूसरी   नाजायज    ओलाद  है  !

Saturday, 20 February 2016

राष्टवाद का गुलाल जनता की आखँ में उड़ेल दिया !

 देश में रोजगार नहीं ,मंहगाई सातवे आसमान पर,देश के पूंजीपती,उद्योगपति और देश के ही इन्वेस्टर देश में ही पैसा नहीं लगा रहे ?कुल जीडीपी का १०गुना से ज्यादा कालाधन भ्रष्टाचारियो के यहाँ जमा ?ऊपर से देश में अराजकता का माहोल ?न सिर्फ साम्प्रदायिकता वरन जातियों का जहर भी देश की हवाओ में घोला जा रहा है ?    सालो   से चली  आ रही  भ्रष्ट  साशन   व्यवस्था  ! अनुपयोगी  ढेर   सारे  विभाग जो आम आदमी के शोषण तक सीमित है !, संवैधानिक ,वैधानिक  अधिकार  भीड़ तंत्र  में   खो गये और ,न्यायिक  व्यवस्था   में कोई परिवर्तन नही ?  कालाधन के और व्यवस्था परिवर्तन  के  नाम पर सरकार बनाने   वालो ने  इन   बातो का  नाम छोड़ दिया ! और सर्जिकल  स्ट्राइक  ,राष्ट्रवाद और  कश्मीर के नाम   का   शगूफा छोड़  दिया ,  एक और बीफ के नाम  फैलाई जा रही साम्प्रदायिकता    तथा  दूसरी और देश में  राष्टवाद   का   गुलाल   देश की   जनता की आखँ   में   उड़ेल   दिया  ! उस  पर   ये  सिलसिला देश का प्रधान मंत्री स्मार्ट सिटी ,डिजिटल इंडिया,और विदेशो के निवेश पर आधारित मेक इन इंडिया की बात बड़े घमंड से पूरी दुनिया में  करते  फिर रहे !
रुपया  गिर  रहा  ,  पेट्रोल  डीजल  और  मंहगाई   समाले नही संभल रही , जनता  देश भक्ति के नाम के गुलाल  से  सनी   आँखे   मल  रही           !  

लानत हे ऐसी खोखली देश भक्ति पर ! जो देश और समाज तोड दे !

 कड़वा   सच   !
आपकी देशभक्ति से इतनी घृणा हो गई है कि देशद्रोही का आरोप मुझे सुकून देता है। आपकी धर्मांधता और शून्यता से पैदा हुई खीझ से देशभक्ति शब्द की सकारात्मकता मेरी नज़र में ख़त्म हो चुकी है। देशभक्ति की आपकी परिभाषा इतनी खोखली लग रही है कि मुझे देशद्रोह लुभाने लगा है। । देशभक्तो, अपनी करनी पर थोड़ा गौर करिए। आपको लग रहा है कि आप ही इस देश के रक्षक और योद्धा हैं, लेकिन हमारी नज़रों से भी खुद को एक बार घूरिए और कुछ हो ना हो इससे, लेकिन इतना ज़रूर होगा कि देशभक्त होने की आपकी गलतफहमी कुछ बिलांग कम होगी। देश को धर्म और दलित-सवर्ण के पाटों में बांटकर जहर उगलना नई देशभक्ति है। गरीबों, वंचितों और हाशिये पर जी रहे लोगों की बात करनेवालों को पत्थर मारना नई देशभक्ति है। सरकार की नीतियों और योजनाओं से असंतुष्टि जताने वालों को धमकाना नई देशभक्ति है। संविधान और संवैधानिक मूल्यों की बात करने वालों की जूतमपैजार करना नई देशभक्ति है। लोकतांत्रिक पद्धत्ति से सरकार बनाने वालों को, सरकार चलाने नही देना नई देश भक्ति है । मुद्दों पर आधारित विरोध प्रकट करने में किसी राजनैतिक पार्टी या धर्म का ध्यान ना रख, बिना पक्षपात किए सवाल करने वालों को पाकिस्तान का दलाल कहना नई देशभक्ति है। सार्वजानिक और राजनैतिक जीवन से धर्म को दूर रखने की अपील करने वालों को देशद्रोही का तमगा देना, नई देशभक्ति है। वैचारिक मतभेद का जवाब शारीरिक और शाब्दिक हिंसा से देना नई देशभक्ति है। आपकी तरह हमने कभी धर्म और जाति देखकर वोट नहीं दिया। आपकी तरह हमारी विचारधारा स्वार्थजनित पक्षपात से नहीं बनती-बदलती। धर्म तो मेरा भी हिंदू है,मैं अपवाद नहीं। कई ऐसे लोग हैं जो कट्टर हिंदू और ब्राह्मणवादी परिवार से होकर भी इस व्यवस्था का विरोध करते हैं। पता है क्यों, क्योंकि इस व्यवस्था का हिस्सा होने के कारण हम इसकी बुराइयों और अन्याय को अच्छी तरह समझते हैं। आपकी तरह अंधे राष्ट्रवादी हम नहीं हैं, लेकिन हमें इस मिट्टी और यहां के लोगों से इतना प्यार है कि आप सोच भी नहीं सकते। इसकी विविधता और इसकी लोकतांत्रिक परंपरा के हम दीवाने हैं। हमें किसानों, मजदूरों, शोषितों की और यहां के हर इंसान की परवाह होती है। जाति, धर्म, वर्ग, संप्रदाय, आस्तिक-नास्तिक इन सब भिन्नताओं से परे हमें इंसानों की तकलीफ रुलाती है। आपका दर्द फर्जी है। वह संवेदना ही क्या जो पक्षपात करके जागे। वह तर्क ही क्या जो अपनों का घेरा बनाकर जागे। देश को खतरा हमसे नहीं, आपसे है। इस्लामिक स्टेट और ISI के खतरे के बीच आप देश को धर्म और समुदाय के आधार पर बांटकर खुश हो रहे हैं। लोगों को भरोसे में लेने की जगह डरा रहे हैं। युवाओं के वैचारिक विरोध को गालियां देकर हमले कर रहे हैं और उनको डरा रहे हैं। नक्सलियों से अब तक नहीं जीत सके और नए लड़ाके घर में ही पैदा कर रहे हैं। तुम्हारी पूंजीवादी साम्यवादी संघवादी नीतियों पर विमर्श करने वाले छात्रों को देशद्रोही कहकर हाशिये पर धकेल रहे हैं। किसानों के लिए सब्सिडी चाहते हैं। आर्थिक स्थिति के हिसाब से आयकर का बंटवारा चाहते हैं। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए काम के सीमित घंटे और बीमा-मेडिकल जैसी सुविधाएं चाहते हैं। महिलाओं के लिए बराबरी चाहते हैं। बुनियादी सुविधाओं की तरक्की चाहते हैं। पुलिस विभाग में सुधार चाहते हैं। ये सबकुछ आपके जैसे देशभक्त कभी नहीं चाहते। आप सिर्फ देश में भगवा झंडा लहराना चाहते हैं और हर प्रकार की विभिन्नता, हर प्रकार के विरोध को कुचल कर सारी व्यवस्था को अपने और  अपने कार्पोरेटर  मित्रो के आधीन चाहते हैं। ना आपकी भाषा संयत है और ना आपके इरादे सही हैं। भारत का नाम लेकर आप चीखते हैं, लेकिन भारत की आत्मा को ही नहीं समझते। इस बहु संस्कृति वाले देश का लोकतंत्र आपको नही सुहाता आप साम्प्रदायिकता के आधार पर देश बनाना चाहते !   आपका विरोध सबको देशद्रोही और पाकिस्तान का दलाल कहता है। आपकी पार्टी और आपकी विचारधारा सही, बाकी सब गलत । ऐसा इस देश में नही चल सकता है आज से पहले भी तुमसे बड़े बड़े आतताई आये और गये ! जाना सबको है लेकिन जाते जाते एक सकारात्मक सोच तो झोड़ जाओ इस देश को एक सूत्र में जोड़ जाओ ! वरना बिखरे हुए समाज और टूटे हुए देश की आने वाली पीढियां तुम्हे कभी माफ़ नही करेगी !

Dhiraj Dubey




Friday, 19 February 2016

आतंकवाद से खतरनाक है वर्ग संघर्ष !

कड़वा सच !
दिल्ली के मंडी हाउस से जंतर मंतर तक निकले मार्च में कन्हैया के समर्थन के नारो के साथ जय भीम के नारे भी सुनाई दिये ! आरक्षण के मुद्दे पर सस्ती लोकप्रियता के लिए की जा रही बयान बाजी से सामाजिक वातावरण में अस्थिरता पैदा होने लगी है !  आतंकवाद से खतरनाक  है  वर्ग  संघर्ष  !  सामाजिक  समरसता   निर्मित   करने   में  इतने  बरस  लगे  लेकिन   हम   आगे   बढ़ने   के  बजाय  आरक्षण   विवाद  छेड़कर   घूम   फिर  के   वहीं   के  वहीं  आ गये  !  इसके दूरगामी परिणाम राष्ट्रवादियो को ही भुगतना पड़ेंगे ! क्योकि समाज में असहिष्णुता का वातावरण तेजी से पनप रहा है ! इस राष्ट्र को किसी एक विचार धारा के अधीन नही रखा जा सकता जनता मोदी के नारो मोदी के वादो के साथ है ! और   आगे   रह  भी  सकती है ! लेकिन इसका मतलब आप ये ने समझे ! की आवाम आपके भगवा कारण के साथ है ! और यही असली संधर्ष की वजह है ! कन्हैया को मिल रहा समर्थन राष्ट्रीयता का प्रमाण पत्र देने वालो के प्रति आक्रोश है !

Wednesday, 18 November 2015

भारत के विश्व गुरु बनने की शुरुआत !

दुनिया   में   आतंकवाद   की  समस्या  नई   नही  है   और  इसके   दुषपरिणाम   भी   पिछले    कई   वर्षो   से   झेलते   आ   रही   दुनिया   की   महा   शक्तियों   का   इतने   सामंजस्य   के   साथ   इतना   आक्रमक   विभीषिका   पूर्ण   प्रतिकार   एक   सुखद   आश्चर्य   है ! और   इससे   ऐसा   प्रतीत   होता है   की  इसकी  पृष्टभूमि   में   मोदी   के   इन   देशो   के  प्रवास   और  मंत्रणाओ   का   भी   प्रभाव   पड़ा    है  ! वरना   जो   देश   आपस   में   प्रतिस्पर्धी   थे   आतंकवाद   के   खिलाफ  उनका   समदर्शी   होना  बिना   किसी  भागीरथी   प्रयास  के   संभव   नही !  क्योकि   मोदी   जानते   है  कि   आतंकियों   के   रहते   वे   सुरक्षित   कतई   नही   है   ! अत:  प्रधान   मंत्री   बनने   के   बाद   उन्होंने   सबसे   पहले   आतंकवाद   के   खिलाफ   दुनिया की    महा  शक्तियों   को   एक    साथ   करने   का   अभियान   चलाया  जो   सफलता   की    और   तेजी से  अग्रसर   है  !
वरना   भारत   जैसे   गरीब   देश   के   लिये   आतंकियों   से   लड़ने   में   इतना   रुपया   बर्बाद   करना  आर्थिक  स्थिति   को   कमजोर   करता  !  कहावत    है  -:  बिना   खुजाये    खाज   गयी  ! अब  रहा   सवाल   देश  की   समस्याओ  का  तो   देश   काल   परिस्तिथि   और   प्रकृति   अनुसार   समस्याए   उतपन्न   होती
रहेगी   और   निपटती   रहेगी  !  कहते    है   ना   जान   है   तो    जहाँन    है  !

Tuesday, 17 November 2015

अशोक सिंघल को सच्ची श्रदांजलि तब होती जब नरेंद्र मोदी उनके अधूरे स्वप्न राम मंदिर

जिस   राम   जन्म भूमि   आंदोलन    की   बैसाखी   के   बल पर   टिककर   भाजपा  खड़ी   हुई ! और   इसी   आंदोलन   का   समर्थन   कर   आर   एस   एस   ने समाज   में   सम्मान   और   स्थान   बनाया ! और   सबसे   पहले   सिंघल   ने  ही  नरेंद्र   मोदी को  प्रधानमंत्री    पद   का   उम्मीदवार  घोषित कराया  !  और   तीन  सौ    सीट   जितने   का  विशवास   जताया   उस  सत्ता के   प्रणेता   के   जीवन   का   संकल्प    एक   आस   एक    उम्मीद   राम   जन्म   भूमि   राम मंदिर   के   विषय   में    उसके    मौन    होते   ही  !  सब   किनारा   कर     गये   मोदीजी  ने   अपनी   श्रदांजलि   में   उनके   द्वाराचलाये   सेवा   प्रकल्पों   का   उल्लेख   किया !  लेकिन   उनके   स्वप्न   उनके   संघर्ष   और   आंदोलन   को अनदेखा   कर   गये  !  भाजपा   या   संघ   किसी  ने   भी   उन्हें    राम मंदिर   या   रामजन्मभूमि   आंदोलन  से   परिभाषित   नही   किया  ! अशोक   सिंघल को   सच्ची   श्रदांजलि   तब   होती   जब   नरेंद्र    मोदी  उनके   अधूरे    स्वप्न   राम मंदिर   संकल्प   पर   अपनी   भावना   प्रगट   करते   अपना   रुख   स्पष्ट   करते  !