Saturday, 30 December 2017

विकास '' मिया मिठू बन गया '' ?

A B P न्यूज़ ने साल २०१७ का '' व्यक्ति विशेष '' चुनने हेतु देश की जनता से ओपिनियन माँगा तो ६० प्रतिशत लोगो ने हार्दिक पटेल को २६ प्रतिशत लोगो ने मोदी को और ७ प्रतिशत लोगो ने राहुल के पक्ष में वोट दिए ? इससे घबरा कर गोदी चैनल ने '' यू टर्न '' ले कहा वर्ष के दो व्यक्ति विशेष चुने जायेगे , एक हार्दिक को जनता ने चुना और दूसरा A B P न्यूज़ चैनल के एडिटरों ने  मोदी को और इस तरह विकास '' मिया मिठू बन गया         

Friday, 29 December 2017

फिर देखो सरकार कैसे न बन पाए ?

कांग्रेस को  उम्मीदवार  बदलना होगा ।
कांग्रेस को पूरा  फेरबदल  करना होगा   सभी जगह  उम्मीदवार  बदलना होगा । इन्दिराजी ने अपने राजनीतिक जीवन मे दो बार यह प्रयोग कर सत्तासीन हुई ? राहुल गांधी को चाहिए कांग्रेस में नया नेतृत्व पैदा करे, सारे अप्रासंगिक हो चुके और सत्ता का दोहन कर चुके भूतपूर्वो के भरोसे अपना भविष्य तय न करे ?   पुराने हारे जीते  को  न आजमाया इनको '' लोकसभा '' की तैयारी कराये  लोकसभा क्षेत्र की विधान सभा सीटों पर जिम्मेदार बनाये  मध्यप्रदेश  विधान सभा चुनावी समर में  सबसे ज्यादा  आवश्यकता  कांग्रेस को   मालवा  निमाड  पर  ध्यान देने और टिकिट वितरण  खरी कसौटी पर  तय   करना होगा ,पुश्तैनी  दावेदार और उनके जानी दुश्मन दावेदारों को दरकिनार कर ,नया नेतृत्व सामने लाये , उनमे से कोइ नहीं  होगा तो सबको संगठित  कर सामूहिक नेतृत्व पैदा  किया जा सकेगा   /  पुराने  जीते , हारे मठाधीशो को  लोकसभा क्षेत्र की  विधानसभा सीटों का जिम्मेदार बनाये  आगे की तैयारी कराये ? फिर देखो  सरकार कैसे न बन पाए ?   
            मध्यप्रदेश  विधान सभा चुनावी समर में  सबसे ज्यादा  आवश्यकता  कांग्रेस को   मालवा  निमाड  पर  ध्यान देने और टिकिट वितरण  खरी कसौटी  पर करना होगा ,

// देश के होनहार छात्रों पर हो रहा अत्याचार कभी नजर आएगा //

कड़वा सच ?
// देश के होनहार छात्रों पर हो रहा अत्याचार कभी नजर आएगा //
/जिस तरह 3 तलाक मुस्लिम बहनो का शोषण कर रहा था, उसी तरह सालों से आरक्षण शोषण कर रहा है। मोदी सरकार को मुस्लिम महिलाओ का शोषण नजर आता लेकिन देश के होनहार छात्रों पर हो रहा अत्याचार कभी नजर आएगा ? इसके लिए संसद में क्या कभी बिल लाया जाएगा ? यह कुप्रथा कब खत्म होगी जो सिर्फ 70 सालो से होनहारों की बलि ले रही है , आये दिन प्रतिभाओं का हनन होता है सवर्ण छात्र मन ही मन यह मान लेता है कि उसको तो नौकरी मिलनी ही नही है।ऐसी कौन सी व्यवस्था सरकारे चला रही है जो 70 सालों से गरीबी नही दूर कर पायी और जो सम्पन्न थे वो और संम्पन होते जा है , और पड़ा लिखा माध्यम वर्गीय इस व्यवस्था से शोषित और पीड़ित है , आज उनके बच्चे त्रस्त होकर आत्महत्या तक कर लेते हैं। क्या समानता का अधिकार सवर्ण बच्चों को नही है ?

ढोंगी योगी को शर्म आये आज गौरव नष्ट हो रहा है ?

     गीता प्रेस गौरखपुर  बंद होने    की कगार पर है।   ज़ी न्यूज़ के अनुसार गीता प्रेस इस परिस्थिति में नही है कि वो अपने कार्यकर्ताओं की पगार भी दे सके,क्योंकि वे सनातन धर्म की किताबें बिना किसी फायदे के बेच रहे है।अगर गीता प्रेस बंद हो गयी तो यह हमारे धर्म की बहुत बड़ी हार होंगी।  सनातन धर्म के  शास्त्रोक्त  ,प्रमाणिक  साहित्य    सहज  सरल और अति सस्ते में आप पा सकते   है /  आप हनुमान चालीसा पा सकते हैं सिर्फ एक या दो रुपये में गीता प्रेस के द्वारा छपी ''गीताप्रेस ''    ने हिन्दू धर्म का पोषण किया है / अगर आप वाकई में हिन्दू धर्म  को  बचाने   की इच्छा रखते हैं ,तो आप जरूर  एक  पोस्टकार्ड योगी को  लिखे  ताकि गीता प्रेस बंद होने से बच सके  ? और  ढोंगी  योगी  को  शर्म आये , जिस गोरखपुर ने  इतना  विशवास और  सम्मान दिया   आज उसका  गौरव   नष्ट हो रहा है ?

Tuesday, 26 December 2017

कांग्रेस यहाँ क्यों हारती है ?

  कांग्रेस  मध्यप्रदेश  प्रभारी ने पूछा  कांग्रेस  यहाँ  क्यों हारती है ?
टिकिट के लिए एक नाम ऊपर से आता , सारे दावेदारों के बिच वो अकेला  पड़ जाता ?
सभी  को विश्वास में लाईये , एक  साथ बिठाइये ,  सामंजस्य बनाइये , सब को उचित सम्मान और  स्थान  दिलाइये   , सामूहिक चुनाव लडाइये ?

बैंक कभी भी आपकी जमापूंजी हड़प सकता है।

यह आपके लिए नोटबंदी से भी ज्यादा चौंकाने वाली खबर है। आपकी जिंदगी भर की जमापूंजी (SAVING/ INVESTMENT) जिसे आपने BANK में इसलिए रखा है, क्योंकि वो वहां सुरक्षित रहेगी, अब खतरे में हैं। बैंक कभी भी आपकी जमापूंजी हड़प सकता है। आपको आपकी FD या सेविंग खाते में मौजूद पैसे का भुगतान करने से इंकार कर सकता है। नरेंद्र मोदी सरकार के नए कानून FRDI BILL में बैंकों को इस तरह के अधिकार दिए जा रहे हैं। यह कानून संसद के शीतकालीन सत्र में पेश होगा और विपक्षी सांसदों की संख्या काफी कम होने के कारण पूरी उम्मीद है कि पास भी हो जाएगा। इसका पूरा नाम है फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल -2017.  (FINANCIAL RESOLUTION AND DEPOSIT INSURANCE BILL 2017) आपकी गाढ़ी कमाई होगी बैंक की
सबसे बड़ा सवाल बैंकों में रखे आपके पैसे को लेकर है। यह बिल बैंक को अधिकार देता है कि वह अपनी वित्तीय स्थ‍िति बिगड़ने की हालत में आपके जमा पैसे लौटाने से इनकार कर दे और इसके बदले आपको सिक्योरिटीज अथवा शेयर दे दे।

क्या है एफआरडीआई बिल ?
फाइनेंशियल रेजोल्यूशन एंड डिपॉजिट इंश्योरेंस बिल (एफआरडीआई बिल) वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने की स्थिति से निपटने के लिए बनाया गया है। जब भी कोई बैंक अपना कारोबार करने में सक्षम नहीं होगा और वह अपने पास जमा आम लोगों के पैसे लौटा नहीं पाएगा, तो उस बैंक को इस संकट से उभारने में मदद करेगा ये एफआरडीआई बिल। किसी भी बैंक, इंश्योरेंस कंपनी और अन्य वित्तीय संस्थानों के दिवालिया होने की स्थ‍िति में उसे इस संकट से उभारने के लिए यह कानून लाया जा रहा है।

आम आदमी के लिए इसलिए है चिंताजनक ?
इस प्रस्तावित कानून में 'बेल इन' का एक प्रस्ताव दिया गया है। अगर इस प्रस्ताव को मौजूदा मसौदे के हिसाब से लागू कर दिया जाता है, तो बैंक में रखे आपके पैसों पर आपसे ज्यादा बैंक का अधिकार हो जाएगा। इससे बैंकों को एक खास अधिकार मिल जाएगा। बैंक अगर चाहें तो खराब वित्तीय स्थ‍िति का हवाला देकर आपके पैसे लौटाने से इनकार कर सकते हैं। इसके बदले वह आपको शेयर्स व अन्य प्रतिभूति दे सकते हैं। जिसे आप न चाहें, तो भी लेना होगा।

क्या होता है बेल-इन ?
बेल-इन का साधारण शब्दों में मतलब है कि अपने नुकसान की भरपाई कर्जदारों और जमाकर्ताओं की जेब से करना। इस बिल में यह प्रस्ताव आने से बैंकों को भी यह अधिकार मिल जाएगा। जब उन्हें लगेगा कि वे संकट में हैं और उन्हें इसकी भरपाई करने की जरूरत है, तो वह आम आदमी के जमा पैसों का इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे। इस मामले में सबसे डरावनी बात यह है कि बैंक आपको ये पैसे देने से इनकार भी कर सकते हैं। हालांकि वित्त मंत्री अरुण  जेटली ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह परिभाषित करने के लिए कहा है, जो फिलहाल मसौदे में किया नहीं गया हैं

'' बकरे की माँ कबतक खेर मनाएगी '' '' बैंक तो जायेंगी,'' ?

 यदि  बैंक का  एन पी ए, तीस  प्रतिशत - हो जाय ?  तो रिजर्व  बैंक  लॉक आउट  कर देती है , लेकिन  राष्ट्रीयकृत  बैंको  का  एन पी ए,चोपन , पचपन  प्रतिशत  है ,और  लगातार बढ़ रहा है , ऊपर से नोटबंदी और जी एस टी  ने इसे  चरम पर  पहुंचाने  में कोई  कसर  नहीं की  सात  सौ   चौतीस लाख करोड़ रु  का एन पी ए, आर ,बी आय  की  बर्दाश्त के बाहर है,   कवर   नहीं किया जा सकता ?  हांलाकि , मिनिमम  बेलेन्स  पेनल्टी  ने बैंको  को संजीवनी  दी जरूर   है , लेकिन यदि कोई चमत्कार नही   हुआ तो  '' बकरे की  माँ  कबतक  खेर  मनाएगी  '' बैंक  तो   जायेंगी,''  तब  लोगो को  अक्ल  आएगी ?