Monday, 11 September 2017

हिन्दू राष्ट्रवादियों को तानाशाही का मतलब तब समझ में आएगा..???.

 नोटबंदी करके  मोदीजी  फुले  न समाये  ... व्यापार-कारोबार का भट्टा बिठाया... विकास दर को नीचे गिराया... मजदूरों को बेरोजगार बनाया... नौकरियों को घटाया... पढ़े-लिखों  नौजवानो , सेल्फ एम्पॉलईयो  और मध्यमवर्गियो  पर  बैंक में     अपने ही जमा पैसे पर  मिनिमम  बेलेंस  के नाम का जजिया  कर लगाया ?  पेट्रोल  डीजल  अम्बानी  को देश की जनता का खून  पिलाया ? आम  आवाम को भूखे मरने पर मजबूर कराया.?.. अभी तो आंकड़ों में परिणाम सामने आया... अब जब जगह-जगह त्राहि मचेगी... छोटे व्यापारी-कारोबारी पर तालेबंदी की लहर चलेगी... उद्योगों की चिमनियों का उठता धुआं जब दम तोडऩे लगेगा... निरुत्साही कारोबारी जब कम कारोबार कर झंझटों से मुक्ति की जुगत ढूंढने लगेगा तब मोदीजी आपकी अनुभवहीनता और तानाशाही का पता दुनिया को चलेगा... देश जुमलों और संवादों से चलाया जा रहा है.. मीडिया को तोता बना दिया गया है... जो रटे-रटाए संवाद बोलकर भटेतगीरी करता नजर आता है... मोदीजी में इतना अहंकार भर दिया कि वो आलोचना बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं... नसीहत तो दूर सुझाव तक देने वाले को ठिकाने लगा  दिये जाते  हैं... इसलिए सारे के सारे खामोश रहने में ही अपना भला मानते हैं... विपक्षी भी उनकी ताकत और हिमाकत को पहचानते हैं...   ... बड़े-बड़े कांग्रेसी भी विरोध की औपचारिकता निभाते हैं..?. ...    भविष्य की इस आशंका को पहले ही व्यक्त कर दिया था...? लेकिन .... आगे बढ़कर पीछे हटने को अपनी हार मानने वाली सरकार ने अपनी जीत के लिये देश को हरा दिया... असली तो असली नकली नोटों का बोझ देश पर लाद दिया..?. आतंकवाद मिटाने और नकली नोट चलन से हटाने की लफ्फाजी सामने आ गई... 99 प्रतिशत धन बैंकों में आ गया... कालाधन कहां गया.?.. इस नाकामी से खिसियाई सरकार ने जीएसटी का कानून लाद दिया... कानून तो कानून हर माह खरीदी-बिक्री के हिसाब-किताब का बोझ व्यापारियों पर बढ़ा दिया... सरकार की इस मूर्खता का परिणाम यह है कि अब कोई व्यापार-कारोबार करना नहीं चाहता है... कम कमाने और चैन की नींद सोने  का यह भाव जब देश में छा जाएगा ? तब संगठित व्यापार देश पर हावी हो जाएगा... मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए मार्ग खुल जाएगा... देश फिर ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रवेश की तरह   चंद  मुठीभर  लोगो की हाथ की कठपुतली  बन कर  रह  जाएगा..?. फिर विकास दर के आंकड़ों में केवल विदेशियों का विकास नजर आयेगा... तब  देश  की  जनता  को   और  उन  हिन्दू  राष्ट्रवादियों को जो  आज   सत्ता  की बंदरबाट  में तल्लीन है , मनमानी, नादानी, तानाशाही का मतलब तब समझ में आएगा..???.  

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